मेट्रो में चीन की दीवार
Posted: Wed Jun 13, 2018 3:50 pm
मेट्रो में चीन की दीवार
बात उन दिनों की है जब हम छोटे हुआ करते थे... उस समय मेरे मामा मुझे बातों बातों में बताया था की दुनिया सिर्फ एक ही चीज़ है जो अंतरिक्ष से भी दिखती है और वो है चीन की दीवार. ये बात सुन कर मानो लगा की क्या कोई दीवार इतनी बड़ी हो सकती है की आसमान से भी दिख सके. उस समय से अब तक ये बात मेरे ज़ेहन में बसी हुई है, कि कोई दीवार इतनी बड़ी है की वो राकेट में बैठे किसी को इतनी आसानी से दिख जाती है. फिर क्या था, उसके बाद तो जहाँ जहाँ तहां में चीन की दीवार के बारें में जानने में रूचि दिखाने लगा. इसको किसने बनाया, कब बनाया इत्यादि. खोजबीन करते करते उम्र भी बढ़ती गयी.. पर चीन की दीवार के प्रति उत्सुकता आज भी उतनी ही बनी रही. ये जब अमिताभ बच्चन की दीवार का पोस्टर देखा तो लगा शायद इसमें भी वो दीवार दिखाएँ. पर यहाँ तो संबंधों की दीवार ने मेरा चीन की दीवार देखने का सपना टूट गया. जिस फिल्म में दीवार का ज़िक्र होता मुझे लगता इसमे पक्का चीन की बात होगी. इस चक्कर में कुछ B ग्रेड फिल्मों को देखने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ क्योंकि उनके नाम में दीवार का ज़िक्र था( अनुरोध है उनके नाम आप न पूछे ). उसके बाद चीन की दीवार को देखने का सौभाग्य कराटे किड नाम की मूवी में हुआ.. जिसमे जैकी चैन गुरु बनके अपने चेले को कराटे की शिक्षा दे रहे थे. कुछ ऐसा ही एक सीन चांदनी चौक से चाइना नाम की फिल्म में अक्षय कुमार अपने गुरु से ट्रेनिंग लेते हुए दिखे... इन दोनों फिल्मों को देखने का शायद एक कारण दीवार भी रही होगी. क्योंकि सिर्फ समय ही बदला था उत्सुकता नहीं. कभी कभी तो लगता है कि उसकी एक ईंट भी मिल जाये तो ज़िन्दगी बदल सकती है. पर सोचते सोचते मेट्रो के सफ़र ने मेरी ज़िन्दगी बदल दी.
हुडा सिटी सेंटर में शाम को बढ़ी मुश्किल से धक्का मुक्की करके बैठने की सीट हासिल की. और दीवार से चिपक कर बैठ गया. शायद इसी भीड़ से लड़ाई करके एक लड़की भी मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गयी थी. बड़ी बड़ी ऑंखें, आँखों में काजल,बालों में करीने से लगाया गया बैंड, चेहरे पर चमक बिलकुल भी एहसास नहीं दिला रही थी कि मोहतरमा पूरे दिन ऑफिस के कामकाज को निपटा कर आ रही हैं. खैर मुझे क्या करना में तो सफ़र के दौरान के सुखद एहसास से खुश था. पर जैसे जैसे मेट्रो के स्टेशन आते गए मोहतरमा ईद का चाँद होती गयी. और 4 स्टेशन के बाद तो उनके और मेरे बीच इतनी बड़ी दीवार खड़ी हो गयी जो शायद चीन के दीवार से भी बड़ी थी.
@csahab
ww.twitter.com/csahab
बात उन दिनों की है जब हम छोटे हुआ करते थे... उस समय मेरे मामा मुझे बातों बातों में बताया था की दुनिया सिर्फ एक ही चीज़ है जो अंतरिक्ष से भी दिखती है और वो है चीन की दीवार. ये बात सुन कर मानो लगा की क्या कोई दीवार इतनी बड़ी हो सकती है की आसमान से भी दिख सके. उस समय से अब तक ये बात मेरे ज़ेहन में बसी हुई है, कि कोई दीवार इतनी बड़ी है की वो राकेट में बैठे किसी को इतनी आसानी से दिख जाती है. फिर क्या था, उसके बाद तो जहाँ जहाँ तहां में चीन की दीवार के बारें में जानने में रूचि दिखाने लगा. इसको किसने बनाया, कब बनाया इत्यादि. खोजबीन करते करते उम्र भी बढ़ती गयी.. पर चीन की दीवार के प्रति उत्सुकता आज भी उतनी ही बनी रही. ये जब अमिताभ बच्चन की दीवार का पोस्टर देखा तो लगा शायद इसमें भी वो दीवार दिखाएँ. पर यहाँ तो संबंधों की दीवार ने मेरा चीन की दीवार देखने का सपना टूट गया. जिस फिल्म में दीवार का ज़िक्र होता मुझे लगता इसमे पक्का चीन की बात होगी. इस चक्कर में कुछ B ग्रेड फिल्मों को देखने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ क्योंकि उनके नाम में दीवार का ज़िक्र था( अनुरोध है उनके नाम आप न पूछे ). उसके बाद चीन की दीवार को देखने का सौभाग्य कराटे किड नाम की मूवी में हुआ.. जिसमे जैकी चैन गुरु बनके अपने चेले को कराटे की शिक्षा दे रहे थे. कुछ ऐसा ही एक सीन चांदनी चौक से चाइना नाम की फिल्म में अक्षय कुमार अपने गुरु से ट्रेनिंग लेते हुए दिखे... इन दोनों फिल्मों को देखने का शायद एक कारण दीवार भी रही होगी. क्योंकि सिर्फ समय ही बदला था उत्सुकता नहीं. कभी कभी तो लगता है कि उसकी एक ईंट भी मिल जाये तो ज़िन्दगी बदल सकती है. पर सोचते सोचते मेट्रो के सफ़र ने मेरी ज़िन्दगी बदल दी.
हुडा सिटी सेंटर में शाम को बढ़ी मुश्किल से धक्का मुक्की करके बैठने की सीट हासिल की. और दीवार से चिपक कर बैठ गया. शायद इसी भीड़ से लड़ाई करके एक लड़की भी मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गयी थी. बड़ी बड़ी ऑंखें, आँखों में काजल,बालों में करीने से लगाया गया बैंड, चेहरे पर चमक बिलकुल भी एहसास नहीं दिला रही थी कि मोहतरमा पूरे दिन ऑफिस के कामकाज को निपटा कर आ रही हैं. खैर मुझे क्या करना में तो सफ़र के दौरान के सुखद एहसास से खुश था. पर जैसे जैसे मेट्रो के स्टेशन आते गए मोहतरमा ईद का चाँद होती गयी. और 4 स्टेशन के बाद तो उनके और मेरे बीच इतनी बड़ी दीवार खड़ी हो गयी जो शायद चीन के दीवार से भी बड़ी थी.
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